Tuesday, April 12, 2011

सीबीआई, सीवीसी और जन लोकपाल


हमारे देश में सरकार में ढेरों जांच ऐजेंसी बना ली है। सीवीसी, सीबीआई, डिपार्टमेण्टल विजिलेंस, एण्टी करप्शन ब्रांच, स्टेट विजिलेंस हर ऐजेंसी के अन्दर कुछ कमी छोड़ दी गई है, जिससे वो ऐजेंसी बेकार हो गई है और सबसे बड़ी बात ये है कि सारी की सारी ऐजेंसी सरकार के अण्डर में आती है। उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है जिन्होंने चोरी कर रखी है, उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है भ्रष्टाचार कर रखा है, उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है जिनके खिलाफ इन जांच ऐजेंसी को जांच करनी है जो ये सीधी सीधी बात है कि यह जाँच एजेंसी अपना काम नहीं कर पाती। हमारा कहना ये है कि ये सारी जांच ऐजेंसी की हमें कोई जरूरत नहीं है। हमारा देश इनके ऊपर इतना पैसा बर्बाद कर रहा है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। इन सारी जांच ऐजेंसियों को केन्द्र स्तर पर विलय करके लोकपाल के अण्डर में लाया जाए और राज्य स्तर विलय करके इनको लोकायुक्त के अण्डर में लाया जाये।

सीबीआई, सीवीसी का जन लोकपाल बिल में विलय
कुछ लोगों का कहना है कि आप सीबीआई, सीवीसी, डिपार्टमेण्टल विजिलेंस इन सारी ऐजेंसिस को एक साथ इसके अन्दर क्यों मर्ज रहे हैं? सीबीआई को रहने दीजिए काम करने दीजिए, सीवीसी को काम करने दीजिए। आप अगर लोकपाल के लिए अलग से अफसरों की तैनाती कर दीजिए। 

कुछ लोगों का कहना है सीबीआई इतनी बुरी भी तो नहीं है, सीवीसी आखिर इतनी बुरी भी तो नहीं है। हमें ये सब बातें सुनकर बड़ा आश्चर्य हो रहा है। ये अचानक सीबीआई इतनी अच्छी कब से लगने लगी? एक भी केस सीबीआई ने ऐसा किया हो जो बिना कोर्ट की मॉनिटरिंग के ठीक ठाक किया हो? सीबीआई सीधे-सीधे भ्रष्ट, चोरों और डाकुओं के अण्डर में काम करती है। और हम यह उम्मीद करें की वो चोरों और डाकुओं के खिलाफ एक्शन लेगी। ऐसा कतई नहीं हो सकता। सीबीआई के अन्दर पैसा हम फूंकते रहें, उनके कर्मचारियों को तनख्वाह देते रहें और सीबीआई बैठकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती रहे क्या हमें ऐसे सीबीआई की जरूरत है? क्या हमें सीवीसी की जरूरत है? क्या हमें ऐसे डिपार्टमेण्टल विजिलेंस की जरूरत है?

एक तरफ तो हम इन ऐजेंसिस को भ्रष्टाचार बढ़ाने के लिए काम करने की छूट दे रहें हैं और दूसरी तरफ ये कहें कि लोकपाल को और कर्मचारी दे दो और नई पोस्ट क्रिएट कर दो। हमें ये लगता है कि ये बेमानी बातें हैं। जो ऐजेंसिस आज काम नहीं कर रहीं हैं उनको बन्द करके उनके सारे कर्मचारियों को काम करने के लिए लोकपाल में डाला जाए। जो कर्मचारी भ्रष्टाचार करे उसे नौकरी से निकाल दिया जाए, जो ठीक से काम न करे उसको काम से निकाल दिया जाए, जो काम करे उनको लोकपाल के अण्डर नियुक्त कर दिया जाए।

15 comments:

  1. I think above said article suggesting right thing to execute corrupted people and government.

    ReplyDelete
  2. हम देखते है की अधिकतर राजनितिक पार्टिया सत्तारूढ़ सरकार व दल पर ये आरोप लगते है की ये सी० बी० आइ० का हमारे विरुद्ध या गलत उपयोग कर रहे है तो सरकार के पास ये अच्छा मौका है के इसे लोकपाल में विलय कर दे | ताकि सरकार इमानदार है तो इस पर बेबुनियाद आरोप और राजनीत तो नहीं होगी | सारी जाँच एजेंसियो को लोकपाल में विलय से कई फायदे होगे जैसे जाँच में भ्रम की स्थिति से बचना, खर्च में कमी , स्वयमेव भ्रष्टाचार में कमी (क्योंकि प्रशासन का आकार बड़ा और तंत्र का ढांचा विकृत हो तो भ्रष्टाचार बढ़ता है ), मामलों का जल्द निपटारा (क्योकि देर से प्राप्त न्याय, न्याय नहीं है), सरकार को भी अपने कामो में अधिक केन्द्रित होने में आसानी इत्यादि |

    ReplyDelete
  3. if we feel that CBI is corrupt,then why not examine its working and if found that something wrong is going on or corruption is there then proceed as lokpal will handle other departments where corruption is prevalent. why are we adament to merge it in Lokpal ,if government doesn't want to do so. This way one day someone will say that judiciary or police department is corrupt and merge that also into Lokpal.Then what is the meaning of having various administrative departments in our country,we should only have Lokpal and nothing else. This all doesn't make sense. I would suggest that the demand of merging CBI (corruption handling branch-as said in draft) into lokpal should be dropped...

    ReplyDelete
  4. आपने वो कहानी रो सुनी ही होगी जिसमे एक गधा सूखी घास नही खाता है तो उसका मालिक उसे एक हरे रंग का चश्मा पहना देता है। और उसके बाद गधे को चारो ओर हरी घास दिखने लगती है, और वो उसे खा लेता है।
    बिलकुल इसी प्रकार भारत की जनता के एक बडे भाग को भी भ्रष्ठाचार मे ही सहूलियत होने लगी है। ऐसे मे कैसे वो कोइ ऐसा काम कर ले जो इस भ्रष्ठाचार के सख्त खिलाफ़ हो??

    ReplyDelete
  5. cbi should be given free authority and should report only to the Supreme Court of India

    ReplyDelete
  6. @ved. This remark is against people arguing that CBI need not be a part of Lokpal as Lokpal can investigate CBI corrupt officials. Irrespective of whether CBI is corrupt or non-corrupt if the government controlling it does not allow it to function then what is the use of it? Just to destroy the evidence against politicians and babus? Once CBI destroys evidence then how can Lokpal conclude that a CBI official is corrupt? So not entire CBI but anti-corruption branch of CBI has to be a part of Lokpal.

    ReplyDelete
  7. @ved.There is also an argument that one day someone would say that judiciary or police department is corrupt and merge that also into Lokpal. Here we are speaking independence of culprit and investigating agency. Judiciary is already independent of the government. But judiciary should not investigate its own corruption, hence Lokpal has to investigate independently against judiciary. If you remove anti-corruption wing from police then the other police departments will be investigating non-corruption cases only. Hence rest of the police department need not be independent of the government. Also note that CBI is now even exempted from RTI hence nobody can now know what is happening in CBI.

    ReplyDelete
  8. CBI , CVC YACHYAVAR BHRASHTA SARKARCHE NIYANTRAN ASTE YA AGENCY TYANCHYACH ISHARYAVAR KAM KARTAT. ASHA SANSTHA JAN LOKPAL MADHE VILIN KARA.

    ReplyDelete
  9. आखिर कोइ भ्रष्ठ कैसे किसी दूसरे भ्रष्ठ पर कोइ कार्यवाही होने दे सकता है?????

    ReplyDelete
  10. agar janlokpal bill aa gaya to sansad khali ho jayegi, kyonki wahan to sab chor baithe hai

    ReplyDelete
  11. Jitne jyada department hoga utna corruption badhega isliye jan lok pal ka sujhao thik hai.sath me kharch bhi bhadega.
    BINAY KR SINGH

    ReplyDelete
  12. हम देखते है की अधिकतर राजनितिक पार्टिया सत्तारूढ़ सरकार व दल पर ये आरोप लगते है की ये सी० बी० आइ० का हमारे विरुद्ध या गलत उपयोग कर रहे है तो सरकार के पास ये अच्छा मौका है के इसे लोकपाल में विलय कर दे |
    आपने वो कहानी रो सुनी ही होगी जिसमे एक गधा सूखी घास नही खाता है तो उसका मालिक उसे एक हरे रंग का चश्मा पहना देता है। और उसके बाद गधे को चारो ओर हरी घास दिखने लगती है, और वो उसे खा लेता है।
    बिलकुल इसी प्रकार भारत की जनता के एक बडे भाग को भी भ्रष्ठाचार मे ही सहूलियत होने लगी है। ऐसे मे कैसे वो कोइ ऐसा काम कर ले जो इस भ्रष्ठाचार के सख्त खिलाफ़ हो??

    ReplyDelete
  13. doston bahut achcha example hai.aajkal sarkari mahakamon main rishwat se hi phal phool rahe hain.kuch achche log hai to unko daba kar rakha jata hai.is prayas se pariwartan ki ummid bad gayi hai jab tak iska bhi tod na nikal jaye.kyonki aage nikalne ki hod main bhrastachar khatam hona mushkil hai.jab tak kadi saza ka prawdhan na ho.fhansi ki saza hi man main dar paida karegi or mahgai apne aap kam ho jayegi.sirf imandari hi majboori hogi.phir sir per kafan bandhkar hi bhrastachar ko badawa milega or rishwat lene ki nayi tarkibain izad hongi.sudhar ki sambhawana kam hi hai thoda nazara jaroor badal jayega aam aadmai ki jagah sarkari afsar jyada mujrim honge.kyonki aajkal sarkari nitiyan hi bhrashtachar ko badha rahi hai.insan ki kya galti hai.5000 tankhwah or 50000 khrche (kya is gap ko kam karne ka hal nikal payega ?)(HARYANA PRESIDENT-9136188002)

    ReplyDelete
  14. WHAT IS THE IMPORTANT OF LOKPAL BILL?
    Today who are showing them clean and non-currupted person when ever they get chance they involve in the curruption. this is not for all the person because all the person are not same but the maximum of our population are habituated to live with curruption. when the lokpal works with honestly how they survive with new law.
    deepak kumar sinha(M.C.A [P.U] )

    ReplyDelete